आज हम आपको हिन्दी व्याकरण के आधार के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें साधारण बोलचाल में हम ‘अक्षर’ कहते हैं। अक्षर शब्द संस्कृत के ‘क्षर’ धातु के ‘अ’ उपसर्ग लगाकर बना है।जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘अनश्वर’ या ‘अटल’। या सरल शब्दों में कहें तो “जो न घट सके न नष्ट हो सके”। अक्षर का संबंध ध्वनि के उच्चारण पक्ष से है।

अक्षर किसे कहते हैं?

अक्षर की परिभाषा: वह ध्वनि या ध्वनि समूह जिन का उच्चारण एक ही साँस में ही हो जाता है, वह ‘अक्षर’ कहलाता है। या दूसरे सरल शब्दों में समझें तो अक्षर से छोटी से छोटी ध्वनि को कहते हैं, जिसके और टुकड़े ना किए जा सके। अगर हम अक्सर को और अच्छी तरीके से समझे तो यह कहा जा सकता है की अक्षर का अर्थ होता है जो न घट सके और ना ही नष्ट हो सके।

अक्षर की विशेषता 

भारत के बड़े वैज्ञानिक और हिंदी भाषा के जानकारों के द्वारा अक्षर की यह विशेषता बताई गई है कि अक्षर या तो एक ही बल में बोले जाने वाली किसी भी ध्वनि या किसी भी ध्वनि के समुदाय की इकाई को कहा जाता है। अक्षर की इस इकाई का आधार स्वर या फिर व्यंजन वर्ण होता है। बिना अक्षर के किसी भी वर्ण या फिर किसी भी शब्द का निर्माण संभव है इसीलिए अक्षर को स्वर का पर्याय मान लिया जाता है। अक्षर का आमतौर पर भाषा और व्याकरण के इतिहास में अनेक कारणों की वजह से इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी शब्द में कितने अक्षर है इस बात का पता लगाने के लिए हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि उच्चारण कितने झटके या फिर अघात में होता है अर्थात कितनी ध्वनि की इकाइयां उस शब्द में मौजूद है इससे किसी भी शब्द में अक्षर होने का पता चलता है। अक्षर के उदाहरण 

एक अक्षर के शब्द- आ ई उ ए अ 

दो अक्षर के उदाहरण- उर्दू हिंदी प्रेम गाय 

तीन अक्षर के उदाहरण- पहल झटका शब्द 

चार अक्षर के उदाहरण- आधुनिक कठिनाई 

अंतिम शब्द 

आज के इस लेख में हमने आपको अक्षर विषय के ऊपर यथासंभव जानकारी देने का पूर्ण प्रयास किया है इस लेख से आपको अक्षर की जानकारी हो जाएगी और उसे अपने बातचीत में उपयोग करने का ज्ञान हो जाएगा अगर आपको आज का लेख पसंद आया हो तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करें अगर आप की तरफ से कोई सुझाव हो तो उसे कमेंट बॉक्स में जरूर कमेंट करके बताएं।