लिखित भाषा किसे कहते है, परिभाषा, प्रकार (भेद) एवं उदाहरण

आज के लेख में हम “लिखित भाषा” के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। लिखित भाषा, भाषा का लिखित रूप होती है। जिसमें एक व्यक्ति लिखकर विचार या भाव प्रकट करता है, दूसरा व्यक्ति उसे पढ़कर समझता है। इस प्रकार भाषा का वह रूप जिसमें एक व्यक्ति अपने विचार या मन के भाव लिखकर प्रकट करें, और दूसरा व्यक्ति वही पढ़कर उसकी बात समझे वही लिखित भाषा होती है।

लिखित भाषा किसे कहते हैं?

लिखित भाषा की परिभाषा: जिन अक्षरों या चिन्हों की सहायता से हम अपने मन के विचारों को लिखकर प्रकट करते हैं, वह लिखित भाषा कहलाती है। यह भाषा का स्थाई रुप भी होती है। अगर हमें इसे सरल तरीके से समझना है तो ऐसे होगा।

रवि हॉस्टल में रहता है। उसने पत्र लिखकर अपने माता पिता को अपनी कुशलता व आवश्यकताओं की जानकारी दी। माता पिता ने पत्र पढ़कर जानकारी प्राप्त की। यह भाषा का लिखित रूप है। उसने रवि ने लिखकर अपने मन के विचार प्रकट किए और उसके माता-पिता ने पढ़कर उसे समझा।

लिखित भाषा के उदाहरण क्या है?

लिखित भाषा के उदाहरण निम्न है: पत्र ,लेख , समाचार पत्र, कहानी,जीवनी संस्मरण ,तार इत्यादि।

उच्चरित भाषा की तुलना में लिखित भाषा का रूप बाद का है। जो पुराने जमाने में मनुष्य को यह अनुभव हुआ होगा, कि वह अपने मन की बात दूर बैठे व्यक्तियों तक या फिर आगे आने वाली पीढ़ी तक भी पहुंचा दे, तो उसे लिखित भाषा की आवश्यकता पड़ी होगी। अतः लगता है कि मौखिक भाषा को स्थायित्व प्रदान करने हेतु उच्च चरित्र ध्वनि प्रतीकों के लिए “लिखित चिन्ह” का विकास हुआ होगा।

इसी तरह से अलग-अलग तरह की भाषा-भाषी समुदायों ने अपने-अपने भाषिक ध्वनियों के लिए विभिन्न तरह की आकृतियों वाले विभिन्न लिखित- चिन्हो का निर्माण किया, और आगे चलकर इन्हीं लिखित चिन्हों को ‘वर्ण’ कहा जाने लगा। इसलिए जहां मौखिक भाषा की आधारभूत इकाई ‘ध्वनि’ है, तो वह लिखित भाषा की आधारभूत इकाई “वर्ण” है।

लिखित भाषा की विशेषता क्या है?

लिखित भाषा के कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार से है।

1 एक तो यह भाषा का स्थाई रूप है।

2 इस लिखित रूप में हम अपने विचारों और भावों को अनंत काल तक के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।

3 यह भाषा का लिखित रूप आपसे अपेक्षा भी नहीं करता कि वक्ता और श्रोता दोनों आमने-सामने हो।

4 इस रूप की आधारभूत इकाई ‘वर्ण’ है ,जो उच्चारित ध्वनियों को अभिव्यक्त करते हैं।

5 यह भाषा का गौण रुप है।

इस तरह एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि भाषा का मौखिक रूप ही हमेशा प्रधान रूप है। अगर किसी व्यक्ति को लिखना पढ़ना नहीं आता यानी लिखित भाषा नहीं आती तो हम यह नहीं कह सकते कि उसे वह भाषा नहीं आती ।किसी व्यक्ति को कोई भाषा आती है, इसका अर्थ है वह उसे सुनकर समझ लेता है, तथा बोल कर अपनी बात प्रेषित कर देता है। लेकिन इसके साथ ही हम यह भी कहना चाहेंगे कि भाषा का लिखित रूप भी कम उपयोगी  नहीं। पत्र, पुस्तक, समाचार पत्र आदि का प्रयोग हम दैनिक जीवन में करते हैं। हमारे विभिन्न धर्म ग्रंथ जैसे रामायण ,महाभारत या फिर ऐतिहासिक शिलालेख आज तक सिर्फ इसलिए सुरक्षित है, क्योंकि वह भाषा के लिखित रूप में है।

अंतिम विचार 

आज हमने आपको भाषा के दूसरे भेद “लिखित भाषा” के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी सरल शब्दों में देने का किया है, अगर अच्छा लगा तो कृपया शेयर करें।

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