पर्यावरण किसे कहते हैं

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि पर्यावरण किसे कहते हैं और इसकी परिभाषा व अर्थ क्या है दोस्तों पर्यावरण हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन आज आधुनिकीकरण के समय में लोग जाने अनजाने में पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसका प्रभाव संसार के तमाम जाति जनजाति पर पड़ रहा है अब चाहे वह इंसान हो या जीव-जंतु पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए उसके बारे में जानना बहुत जरूरी है पर यही कारण है कि आज हम यहां पर्यावरण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी बताने जा रहे हैं तो आइए देर किस बात की चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि पर्यावरण किसे कहते हैं? 

पर्यावरण का मतलब क्या होता है 

पर्यावरण हिंदी का एक ऐसा शब्द है जो कुल 2 शब्दों से मिलकर बना है। जी हां परी तथा आवरण जब दो शब्द आपस में मिलकर पर्यावरण शब्द का निर्माण करते हैं। जहां परी का मतलब होता है चारों तरफ और आवरण इसका मतलब होता है घेरा यानी कि पर्यावरण का अर्थ हुआ कि चारों तरफ से घेरना।

 पर्यावरण को अंग्रेजी में ऐनवायरमेंट (Environment)  नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि Environment शब्द की शुरुआत फ्रेंच के एनावायरोनेर (Environer)  शब्द से हुई है जिसका मतलब होता है पड़ोस। पर्यावरण शब्द का सही मायने में अर्थ है एक ऐसा परिवेश जहां जीव रहते हैं दरअसल पर्यावरण और जीव इस प्रकृति के दो जटिल और संगठित घटक है क्योंकि पर्यावरण ही है जो मनुष्य के साथ-साथ जीव जंतु के जीवन को भी पूर्ण रूप से नियंत्रित करता है लेकिन मनुष्य कैसा प्राणी है जो दूसरे जीवो और प्राणियों की तुलना में सबसे अधिक पर्यावरण के संपर्क में आता है

पर्यावरण की परिभाषा

पर्यावरण व क्षेत्र है या परिवेश है, जहां मनुष्य पेड़ पौधे तथा जीव जंतु एक साथ रहते हैं या कार्य करते हैं। दरअसल पर्यावरण जैविक और भौतिक दुनिया के तमाम तत्व के बीच संबंधों को दर्शाता है। हमारे चारों ओर फैला वातावरण जो हमारे जीवन और क्रियाओं को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है पर्यावरण कहलाता है।

पर्यावरण के घटक

पर्यावरण के मुख्यता दो महत्वपूर्ण घटक है। 

प्राकृतिक घटक तथा

मानव निर्मित घटक। 

1 . प्राकृतिकघटक 

प्राकृतिक घटक पर्यावरण का सबसे पहला घटक है, जिसके अंतर्गत जैविक तथा अजैविक घटक आते हैं।  इसलिए आइए सबसे पहले जानते हैं, कि जैविक घटक और अजैविक घटक किसे कहते हैं।

जैविक घटक 

जैविक घटक के अंतर्गत वैसे प्राणी आते हैं, जो सजीव यानी जीवित होते हैं। जैसे जीव, जंतु, मनुष्य, पादप इत्यादि। 

अजैविक घटक 

अजैविक घटक के अंतर्गत वैसे पदार्थ आते हैं, जो निर्जीव होते हैं। जैसे जल, वायु, स्थान, मृदा, प्रकाश इत्यादि। 

2 . मानवनिर्मितघटक 

मानव निर्मित घटक पर्यावरण का दूसरा घटक है, जिसके अंतर्गत वह सारे पदार्थ आते हैं जिसे मानव द्वारा निर्मित किया जाता है यानी कि जिसका निर्माण मनुष्य स्वयं करते हैं। जैसे सड़क, उद्योग, पार्क, इमारत, पुल, मकान इत्यादि। 

पर्यावरण का क्षेत्र 

दोस्तों जैसे कि अब आप जान चुके हैं, कि पर्यावरण किसे कहते हैं और पर्यावरण के घटक कौन-कौन से हैं। तो आइए अब हम जानते हैं, कि पर्यावरण के क्षेत्र क्या है? वैसे आपको बता दें, कि पर्यावरण को मुख्यता: 4 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो कुछ इस प्रकार है।

1 .स्थलमंडल 

2 . जलमंडल 

3 . वायुमंडल 

4 . जैव मंडल 

आइए इन चारों क्षेत्रों के बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं। 

1 .स्थलमंडल 

पृथ्वी की सबसे ऊपरी और ठोस परत यानी कि पृथ्वी की परपट्टी को स्थलमंडल कहते हैं । स्थलमंडल पृथ्वी के लगभग एक तिहाई किससे में है जो खनिजों तथा सालों से निर्मित किया गया है और इतना ही नहीं स्थलमंडल मृदा की सबसे पतली परत से ढका हुआ है थल मंडल के अंतर्गत समतल मैदान घाटी पठार पर्वत इत्यादि आते हैं 

स्थलमंडल का महत्त्व 

स्थलमंडल के वजह से ही पृथ्वी पर खनिजों का प्रमुख स्रोत है, यानी कि इसके वजह से पृथ्वी पर खनिज पाए जाते हैं। स्थलमंडल पृथ्वी पर मौजूद मनुष्यों एवं जीव जंतुओं के रहने लिए वन, भूमि तथा भोजन प्राप्त करने के लिए कृषि योग्य भूमि इत्यादि प्रदान करती है। स्थलमंडल के वजह से ही पृथ्वी पर मौजूद पशुओं के चरने के लिए समतल एवं हरीयली वाली ज़मीन पाई जाती है। 

2 . जलमंडल 

पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्रत्येक जल क्षेत्र को जलमंडल कहा जाता है इतना ही नहीं हमारी पृथ्वी का लगभग दो तिहाई हिस्सा जल से घिरा हुआ है जलमंडल के अंतर्गत पैसे क्षेत्र आते हैं जो चलो सखी रे होते हैं समुंद्र महासागर नदियां चीले तथा विभिन्न प्रकार के जलाशय इत्यादि। और इतना ही नहीं भूमिगत रूप से पाए जाने वाले जल, बर्फ, वाष्प इत्यादि भी जल मंडल का ही हिस्सा होता है। 

जलमंडल का महत्त्व

जल पृथ्वी पर मौजूद सभी सजीव प्राणियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जल के कारण ही बादलों का निर्माण होता है और वर्षा होती है। इन्हीं वर्षा के कारण पृथ्वी पर मौजूद पेड़ – पौधे, पशु -पक्षी तथा सभी सजीव प्राणि जी उठते हैं, इसलिए संसार में जीने की लिए जल बेहद ज़रूरी है। 

3 . वायुमंडल 

पृथ्वी पर मौजूद चारों ओर वायु की परत को वायुमंडल कहा जाता है अर्थात पृथ्वी पर मौजूद वायु के आवरण को वायुमंडल कहते हैं वायुमंडल विभिन्न प्रकार के गैसों के मिश्रण को कहते हैं हैं जैसे कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन नाइट्रोजन इत्यादि गैसे इसमें शामिल होते हैं और तो और वायुमंडल में जलवाष्प एवं धूल के कण पाए जाते हैं।

वायुमंडल का महत्त्व

पृथ्वी पर मौजूद वायुमंडल काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वायुमंडल ही सूर्य की हानिकारक किरणों लोगों की रक्षा करता है वायुमंडल की वजह से ही पृथ्वी पर जलवायु एवं मौसम में परिवर्तन आता है रेडियो संचार मैं भी वायुमंडल की सबसे अहम भूमिका होती है लेकिन इसके अलावा वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण काम है पृथ्वी पर मौजूद तमाम सजीव प्राणियों को ऑक्सीजन प्रदान करना ताकि वह जीवित रह सके।

4 . जैवमंडल 

पृथ्वी का वह संकीर्ण हिस्सा जहां पृथ्वी पर मौजूद सबसे महत्वपूर्ण चीज स्थल वायु एवं जल आपस में मिलकर जीवन संभव बनाते हैं उसे ही जैवमंडल कहा जाता है इस मंडल का निर्माण पादप एवं जंतु दोनों आपस में मिलकर करते हैं यह पृथ्वी का सबसे अहम हिस्सा होता है 

जैवमंडल का महत्त्व

जैव मंडल के वजह से ही पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के सजीव प्राणियों के जीवन को अनुकूल बनाता है जी हां जब मंडल का कार्य पृथ्वी पर अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करना होता है ताकि यहां जीवन संभव हो सके जैव मंडल के वजह से ही सजीव प्राणी या अपना जीवन यापन कर पाते हैं।

निष्कर्ष 

तो दोस्तों आज के लेख में हमने जाना कि पर्यावरण किसे कहते हैं पर्यावरण की परिभाषा क्या है और पर्यावरण के घटक कौन-कौन से हैं मुझे उम्मीद है कि आज का यह लेख आप सभी के लिए बेहद उपयोगी रहा होगा लेकिन इसके बावजूद यदि आप  लोगों को इस लेख से संबंधित कोई सवाल पूछने हैं या अपनी राय प्रकट करनी है तो नीचे कमेंट सेक्शन में कमेंट करके अपने सवाल पूछ सकते हैं तथा अपनी राय दे सकते हैं क्योंकि आपकी राय हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है  और इसी के साथ यदि आपको यह लेख पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण किसे कहते हैं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त हो सके

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *