व्यंजन किसे कहते हैं

दोस्तों हिंदी भाषा और लेखन में व्यंजन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। दोस्तों अगर आप भी व्यंजन के बारे में संक्षेप में जानकारी पाना चाहते हैं तो हमारे आज के इस आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें। क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको व्यंजन किसे कहते है, व्यंजन के भेद और उच्चारण अल्पप्राण, महाप्राण, घोष, अघोष और इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं। तो बिना देर किए आइए शुरू करते हैं।

व्यंजन किसे कहते है

जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर वर्णों की सहायता ली जाती है, उन्हें व्यंजन वर्ण कहते हैं। यह हिंदी भाषा में बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार अदा करते हैं। हमने हमेशा यह ध्यान दिया होगा कि प्रत्येक व्यंजन के उच्चारण में अ की ध्वनि छुपी हुई होती है। जिसका उदाहरण है – जैसे क् + अ = ‘क’  , ज् + अ = ‘ज’ ।

दोस्तों यदि हम किसी व्यंजन को स्वर के बिना बोलने की कोशिश करें तो यह काफी कठिन होगा। जब व्यंजन के साथ स्वर जुड़ा नहीं होता तो उसके उच्चारण में कठिनाई होती है। जब भी हम किसी ध्वनि का उच्चारण करते हैं तो भीतर से आने वाली वायु मुंह में कहीं ना कहीं और किसी ना किसी रूप में रूकती है। यह स्वर और व्यंजन के उच्चारण में महत्वपूर्ण होती हैं। 

दोस्तों कई बार कई लोगों को इस बात में कन्फ्यूजन रहता है कि ड़ ढ़ व्यंजन है या नहीं। तू दोस्तों इसका उत्तर भी आज हमारे पास है। ड़ ढ़ भी व्यंजन हैं। वर्णमाला में चार संयुक्त व्यंजनों क्ष, त्र, ज्ञ, श्र को भी शामिल किया गया है। इतना ही नहीं बल्कि उर्दू में अधिकतर प्रयोग किए जाने वाले व्यंजन ज़, फ़, भी व्यंजन में स्वीकृत कर लिए गए है।

हिंदी में कुल कितने व्यंजन होते हैं

दोस्तों हिंदी में मूल व्यंजनों की संख्या 33 है।

संयुक्त व्यंजन कितने होते हैं?

हिन्दी में केवल चार संयुक्त व्यंजन होते हैं । यह है – क्ष, त्र, ज्ञ, श्र ।

व्यंजन की परिभाषा

जिन वर्णों को स्वरों की सहायता से अलग-अलग प्रकार से बोला जाता है उन्हें व्यंजन कहा जाता है।

व्यंजन के भेद (Types of vyanjan in hindi)

मूल रूप से व्यंजन के तीन भेद होते हैं। यह है –

१. स्पर्श व्यंजन

२. अन्तःस्थ व्यंजन

३. ऊष्म व्यंजन

तो चलिए अब हम इन तीनों भेदों को विस्तार से जानते हैं –

1 . स्पर्श व्यंजन :

 जब भी हम किसी व्यंजन का उच्चारण करते हैं और हमारे भीतर से आने वाली हवा कंठ, तालु, मूर्धा, दाँत, या ओठों का स्पर्श करके बाहर, हमारे मुंह तक आती है। ऐसे व्यंजनों को स्पर्श व्यंजन कहा जाता है। 

स्पर्श व्यंजन कितने होते हैं 

हिंदी भाषा में स्पर्श व्यंजन की संख्या कुल 25 है। क् से म्’ तक सभी वर्ण स्पर्श व्यंजन हैं।

अन्तःस्थ व्यंजन : 

जिन व्यंजनों का उच्चारण स्वर व व्यंजन के बीच होता है उन्हें अंतः स्थ व्यंजन कहा जाता है। 

उच्चारण करने की प्रक्रिया पर गौर करें तो, इनका जीभ, तालु, दाँत, या ओष्ठों के सटने से होता है।  परंतु यह पूरी तरह से स्पर्श नहीं कर पाता, जिसके कारण इसे ‘अर्द्धस्वर’ कहते है।

अन्तःस्थ व्यंजन कितने होते हैं?

हिंदी भाषा में इन व्यंजनों की संख्या केवल चार है। यह है – य् र् ल् व् । 

ऊष्म व्यंजन :

 यह उस प्रकार के व्यंजन होते हैं जिन का उच्चारण करते समय भीतर से आने वाली हवा मुंह में आकर गर्मी पैदा करती है। गर्मी पूछना भी कहते हैं और इसीलिए इस प्रकार के व्यंजनों को उष्म व्यंजन कहते हैं। 

ऊष्म व्यंजन कितने होते है ?

हिंदी भाषा में उष्म व्यंजनों की संख्या कुल 4 है जो कि – श् ष् स् ह्।  

अल्पप्राण और महाप्राण की परिभाषा

दोस्तों हम सभी जानते हैं कि व्यंजनों का उच्चारण करते वक्त जोकि मुंह तक आते-आते कई अंगों से टकराती है। उच्चारण में इसी वायु टकराने के विचार से व्यंजनों के दो भेद हैं। यह है –

 i.अल्पप्राण     

ii. महाप्राण

अल्पप्राण की परिभाषा ( अल्पप्राण का अर्थ ) :

अल्पप्राण व्यंजन वह होते हैं जिन का उच्चारण करते वक्त मुह से हर श्वास सीमित रूप से निकलती है। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि ऐसे व्यंजनों का उच्चारण करते वक्त हकार की ध्वनि नहीं निकलती है। प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ वर्ण अल्प- प्राण होता है । जैसे-

क वर्ग – क ग ङ

च वर्ग – च ज ञ

ट वर्ग – ट ड ण

त वर्ग – त द न

प वर्ग  – प ब म

महाप्राण की परिभाषा ( महाप्राण का अर्थ ) :

अल्पप्राण व्यंजनों के विपरीत महाप्राण व्यंजनों में प्रकार की ध्वनि मुख्य रूप से निकलती है। ऐसे व्यंजनों का उच्चारण करते वक्त श्वास निकलती है और समय लगता है जिसके कारण इन्हें महाप्राण कहा जाता है । महाप्राण में व्यंजनों का उच्चारण करते समय प्राणवायु का बहुत महत्व होता है। 

प्रत्येक वर्ग का 2 तथा 4 वर्ण महाप्राण होता है। महाप्राण कि कुल संख्या 14 हैं।

इसके उदाहरण है – 

क वर्ग – ख घ

च वर्ग – छ झ

ट वर्ग – ठ ढ़

त वर्ग – थ ध

प वर्ग  – फ ल

इसके अलावा श ष स और ह भी महाप्राण है । 

घोष और अघोष क्या है ?

घोष : 

हमने हमेशा इस बात पर गौर किया होगा कि कुछ व्यंजनों का उच्चारण करते समय स्वर तंत्रियाँ गूँजने लगती या कंपन होती हैं। इन्हें घोष और अघोष कहा जाता है। प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ वर्ण, सारे स्वर वर्ण तथा य, र, ल, व और ह आदि वर्ण शामिल हैं ।  घोष की कुल संख्या 20 हैं इसके साथ ही जीतने स्वर हैं, सभी सघोष है।

अघोष : 

कुछ वर्ण व्यंजनों का उच्चारण करते समय स्वर तंत्रियों जहां से आवाज आती है उसमें कंपन या गुंजन नहीं हो उसमे किसी प्रकार की क्रीया प्रतिक्रिया नहीं होती है। इन्हें अघोष कहा जाता है। अघोष का सीधा सा अर्थ होता है जिसमें गुंजन ना हो। क वर्ग से प वर्ग के पहला और दूसरा वर्ण अघोष वर्ण हैं इन वर्णों को बोलने में स्वर तंत्र में कंपन नहीं होता हैं इसके अलावा श ष और स भी अघोष वर्ण हैं। अघोष की कुल संख्या 13 हैं।    

व्यंजन का उच्चारण  किसकी सहायता से होता है

दोस्तों यह तो हम सभी को ज्ञात है कि व्यंजनों का उच्चारण मुंह के किसी ना किसी भाग से किया जाता है। जिस स्थान से वर्ण को बोला जाता है, वही उस वर्ण के उच्चारण का स्थान होता है। मुँह में कुल छः स्थान है जहाँ से उच्चारण किया जाता है – कंठ, तालू, मूर्ध्दा, दाँत, ओंठ और नाक आदि।

निष्कर्ष 

तो दोस्तों यह तो हमारा आर्टिकल जिसमें व्यंजन किसे है इसके बारे में हमने आपको पूर्ण जानकारी दी। उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल पसंद आया होगा और इसमें लिखी गई सभी बातें आपको अच्छी तरह से समझ में आ गई होगी।

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